

रिपोर्टर राजकुमार हमीरपुर अखंड भारत
मौदहा हमीरपुर।ग्राम पंचायत सचिवों ने अपनी मांगों को मनवाने के लिए शुक्रवार को भी साइकिल सत्याग्रह का एक अनूठा तरीका अपनाया। सचिव अब शासन की ओर से दिए जाने वाले साइकिल भत्ते के अनुसार उससे ही सभी सरकारी कार्य, फील्ड विजिट और गांवों में भ्रमण कर रहे हैं।
ग्राम पंचायत अधिकारी संघ और ग्राम विकास अधिकारी एसोसिएशन के आह्वान पर चलाए जा रहे शांतिपूर्ण सत्याग्रह आंदोलन के तहत बुधवार से सभी ग्राम सचिवों ने निजी वाहनों का उपयोग पूरी तरह से बंद कर दिया। सचिवों का कहना है कि जब उन्हें वाहन खर्च का उचित प्रावधान नहीं मिलता तो वे भी उसी अनुसार साइकिल का ही प्रयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे साइकिल सत्याग्रह के जरिये सीधे सरकार को संदेश देना चाहते हैं।
10 सूत्री मांगों पर अड़े सचिव
ग्राम सचिवों की ओर से 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन शुरू किया गया है। बीते 1दिसम्बर ग्राम पंचायत अधिकारी एवं ग्राम विकास अधिकारी विकास खंड कार्यालय के बाहर एकत्र हुए थे और खंड विकास अधिकारी को मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा था। ग्राम सचिवों की मांग है कि
ऑनलाइन उपस्थिति प्रणाली को तत्काल वापस लिया जाए। विभागीय दायित्वों के अतिरिक्त अन्य विभागों के कार्यों का अतिरिक्त बोझ न डाला जाए इसके अलावा सेवा संबंधी विसंगतियों का जाए।
जल्द निस्तारण हो। विभागीय ढांचे में सुधार किया जाए। सचिवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कार्य के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएं। ग्रामीण विकास कार्यों में सुगमता लाई
इन्होंने दिखाई एकजुटता
साइकिल सत्याग्रह आंदोलन में नितेश चन्देल, शिवमूरत सिंह, नीरज पटेल,हरी बाबू, अरविन्द कुमार, प्रियंका पटेल, स्वाति शर्मा, भूपेन्द्र कुमार, अरविन्द पाल, सहित काफी संख्या में ग्राम सचिवों ने एकजुटता दिखाई है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिससे ग्रामीण विकास कार्यों पर असर पड़ सकता है।